Category: Amrutam Contributors



सुबह के साढ़े ग्यारह बज रहे थे, दिसम्बर की गुनगुनी धूप धुंध की चादर के पीछे से झाँक रही थी, पुराने ग्वालियर की संकरी गलियों से गुजरते हुए मैं यह महसूस कर पा रहा था कि मानो समय यहाँ ठहर सा गया हो। घरों के आगे प्लास्टिक की कुर्सियों पर बैठकर धूप में अखबार पढ़ते…




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