गिलोई युक्त अमृतम गोल्ड माल्ट

यह 100 तरह के रोगों का नाशक है ।
इसमें है , सभी संक्रमण, वायरस, व
अनेक रोगों से लड़ने की ताकत ।
40 से अधिक बेहतरीन त्रिदोष नाशक
 औषधीय गुणों का मिश्रण ।
आयुर्वेद के अनुसार वात-पित्त-कफ त्रिदोष ही
सर्व रोगों का कारण है ।  अधिकांश मनुष्य इसी से पीड़ित होते हैं  ।
अमृतम गोल्ड माल्ट  -असंख्य विकारों को दूर करने की गुणकारी औषधि से युक्त है। इसमें गिलोय का समावेश है ।
गिलोय को कई नामों  से जाना जाता है जैसे अमृता, गुडुची, छिन्नरुहा, चक्रांगी, आदि |  गिलोय की पत्त‍ियों में प्राकृतिक रूप से
★कैल्शि‍यम,
★प्रोटीन,
★फॉस्फोरस
अच्छी मात्रा में पाया जाता है और इसके तनों में स्टार्च की भी काफी मात्रा में होता है |
नीम के पेड़ पर गिलोय की बेल को चढ़ा देने से इसके गुणों में अधिक बढ़ोतरी हो जाती है |
गिलोय  रस कड़वा और कसैला होता है। गिलोय का पौधा अपने गुणों के कारण वात, पित्त और कफ त्रिदोष नाशक तथा विभिन्न बीमारियों को ठीक करता है।
अमृतम गोल्ड माल्ट से स्वास्थ्य लाभ –
 तेज़ बुखार, अर्श (बवासीर), खांसी, हिचकी, मूत्राअवरोध, पीलिया, अम्लपित्त, एसिडिटी, आँखों के रोग, मधुमेह, खून में शूगर के नियंत्रण में रखने और रक्त विकारों को
 के सेवन से ठीक किया जा सकता है।
अमृतम आयुर्वेद में इसका  प्रयोग सांस संबंधी रोग जैसे दमा और खांसी को ठीक करने में विशेष रूप से किया जाता है। Amrutam Gold Malt
खून बढ़ाता है-
रक्तवर्द्धक होने के कारण यह खून की कमी यानी एनीमिया में बहुत लाभ पहुंचाता है। रक्तातिसार और प्रवाहिका रोग में जब पेट में कोई खाद्य नहीं पचता है, तो
 अमृतम गोल्ड माल्ट
 के सेवन से बहुत लाभ होता है। इसमें गिलोय का क्वाथ /काढ़ा बनाकर मिलाया गया है । सोंठ,  चिरायता, कालीमिर्च, अश्वगंधा की तासीर ने इसे और
भी ज्यादा असरदायी बना दिया है ।
बहुत पुरानी खांसी को दूर करने के लिए  इसका 2-2 चम्मच दो बार सेवन किया
 जाता है । यह उपाय तब तक आजमाए जब तक खांसी पूरी तरह ठीक ना हो जाए |
आजकल चिकनगुनिया जैसे वायरल बुखार के ठीक होने के बाद भी मरीज महीनों तक जोड़ों के दर्द से परेशान रहते है । खून की कमी हो जाती है । भूख नहीं लगती ।इस स्थिति में अमृतम गोल्ड माल्ट
 पराँठे या रोटी में लगाकर खाने से लाभ मिलता है |
सर्दी जुकाम, बुखार आदि में –
एक कप गर्म पानी में 2 चम्मच घोलकर दिन में 3 बार लेने से राहत मिलती है । इसके नियमित उपयोग से रोग प्रतिरोधक क्षमता
 (इम्यून-सिस्टम) को मजबूत होता  है ।
बुजुर्ग व्यक्तियों में कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता होने की वजह से बार-बार होने वाली सर्दी-जुकाम, बुखार आदि को ठीक करता है |
सामान्य जुकाम: एक चम्मच माल्ट खाकर ऊपर से गरम-गरम पी जाये। एकदम असर करेगा।
बच्चों के सामान्य जुकाम नजला, खांसी, बुखार होने पर माल्ट को हर 2 घंटे में दिन में 5 या 7 बार बार चटा दे। एक दिन में ही लाभ होता है ।
तेज़ बुखार : आधे  गिलास उबलते पानी में एक चम्मच माल्ट अच्छी तरह मिलाकर धीरे-धीरे  दिन में 4 या 5 बार लेने से पेट साफ होकर  गर्मी निकल जाती है ।  ऐसा 3 दिनों तक लगातार करे।
पुराने ज्वर  और अन्य बुखार से आई कमजोरी को दूर करने के लिए  गुणकारी औषधि है । सभी तरह के ज्वर,मलेरिया, वायरस द्वारा
 होने वाले बुखार व अन्य रोगों में यह
बहुत गुणकारी है ।
गर्म  दूध में मिला कर पीने से गठिया के रोगियों को बहुत राहत मिलती है |
इसके सेवन से शरीर में रक्त बढ़ता है। रक्ताल्पता (एनीमिया) के रोगी को बहुत
लाभ होता है।
हृदय की निर्बलता ठीक होती है। हृदय को शक्ति मिलने से दिल की कई बीमारियाँ दूर रहती हैं ।
हाथ पैरो या हथेलियों में जलन होने पर माल्ट
को ठन्डे पानी के साथ 2 चम्मच 3 बार लेना चाहिये ।  जलन ठीक हो जाएगी
पथरी के ऑपरेशन के बाद
के सेवन से बहुत लाभ होता है। इसके सेवन से दुबारा पथरी होने की संभावना नहीं होती है।
अमृतम गोल्ड माल्ट  से वृक्कों की प्रक्रिया तेज करके अधिक मूत्र  निकलता है। वात की खराबी से पैदा मूत्र सम्बंधित रोग  इससे दूर होते है।
स्त्रियों के रक्त प्रदर रोग में
का सेवन करने से बहुत लाभ होता है।
ठन्डे दूध में मिलाकर पीने से एसिडिटी
 दूर होती है।
 को सुबह खाली पेट गुनगुने दूध के साथ लेने  से मुंहासे, फोड़े-फुसियां, झुर्रियां, दाग-धब्बे और झाइयां ठीक होती हैं।
 का 5 माह निरन्तर सेवन करें ,
तो जीवनीय शक्ति में भारी वृद्धि होती है,
इसका शुभप्रभाव  व परिणाम यह आता है कि आँखों की सभी छोटी मोटी बीमारियाँ ठीक हो जाती है |
सुबह खाली पेट अमृतम गोल्ड माल्ट 2 या 3 चम्मच गुनगुने दूध से लेने पर बवासीर रोगी को बहुत लाभ होता है और पाईल्स की बीमारी से जल्द ही मुक्ति मिलती है | इसे इस प्रकार दिन में 3 बार लेना चाहिए । रात को सोते समय गुदाद्वार पर
“काया की तेल” का फोहा  लगाने से
मस्से जल्दी सुख जाते हैं ।
“काया की तेल में मिला केशर इत्र मस्सों के लिये बहुत ही लाभकारी है ।
“काया की तेल” की प्रतिदिन मालिश  से
आँखों की रौशनी तेज होती है |
शरीर का रूखापन  के कारण होने वाले त्वचारोग एवम खुजली, ठीक होती है और त्वचा भी चमक उठती है ।
 का सेवन करने से सभी तरह के प्रमेह रोग (वीर्यविकार) ठीक होते हैं।
काम में नाकाम लोग यदि 3-4 महीने लगातार
लेवे, तो नपुंसकता जैसे असाध्य रोग जड़ से दूर होते हैं ।
मौसमी बीमारियों जैसे (डेंगू, स्वाइन फ्लू, मलेरिया, वायरल बुखार हैजा ) के समय खासतौर से मानसून के सीजन में बीमारियों से बचने के लिए
अमृतम गोल्ड माल्ट  को एक कप गर्म-,गर्म
पानी में  रोजाना पियें –
अनेक असाध्य रोगों की घरेलू चिकित्सा-
 
आयुर्वेदिक काढा बनाने की विधि –
 ताज़ा गिलोय की पत्तियों का पेस्ट, महासुदर्शन चूर्ण, कुटकी, चिरायता, दशमूल, अडूसा पत्र,अमलताश का गूदा,
सौंफ,जीरा, मुलेठी, धनिया, हल्दी, तुलसी पत्र,
बेल पत्र, हरश्रृंगार पुष्प, काली मिर्च,अजवाइन, दालचीनी, इलायची,
मेथीदाना, गुड़, और काला व सेंधा नमक सभी 10-10 ग्राम आदि मिलाकर काढ़ा तैयार करें | काढ़ा बनाने की विधि- उपरोक्त सभी समान को दरदरा कर एक लीटरपानी में इतना उबाले कि 200 या 250 एम.एल. रह जाए । ठण्डा होने पर छानकर रखें ।
काढ़े की सेवन विधि– एक बार में  करीब 50 एम.एल. काढ़ा एक गिलास सादा पानी में मिलाकर 3 या 4 बार पीवें ।
काढ़ा बनाने की समस्या हो,तो अमृतम गोल्ड माल्ट का सेवन करें ।
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