अमृतम उपाय लू-लपट से बचने का

अमृतम आलेख
लू-लपट का लगना ।
ये भारत है, यहां लू, भूत-प्रेत,हवा,नजर का लगना आम बात है । और भी कुछ, कब लग जाए । पता नहीं । यहाँ गर्मी के 3 महीने गर्म हवा की वजह मृत्यु का  कारण बनता है ।
 जहाँ सूरज तेजी से तपता है, वहीं आदमी
 जल्दी से टपकता है ।गर्मी में गर्म हवाओं का
 चलना लू लगने का कारण है ।
गर्म जलवायु वाले प्रदेशों में यह प्रकोप 
कई लोगों का लोप (खत्म) कर देता है ।
इसके चलते ..सैकड़ो लोग लू लगने
 से मर जाते हैं।
अत्यधिक गर्मी में भी रोटी-रोजगार,
पेट की खातिर अधिकांश आदमी धूप में
 घूमता  है , लेकिन कुछ लोग ही  लू के
 लपेटे में आने से धूप में जाने के कारण
 अचानक मृत्यु मार्ग में पहुंच जाते हैं ।
👉 हमारे शरीर का तापमान  लगभग 32 से 37° डिग्री सेल्सियस होता है, इस तापमान पर ही हमारे शरीर के सभी अंग सही तरीके से काम कर, रंग भी सुरक्षित रख पाते हैं ।
👉 पसीने के रूप में पानी बाहर निकालकर शरीर 37° सेल्सियस टेम्प्रेचर मेंटेन रखता है, लगातार पसीना निकलते वक्त भी पानी पीते रहना अत्यंत जरुरी और आवश्यक है  ।
जिनका पसीना औऱ सीना निकल हुआ रहता है,  वे स्वस्थ रहते हैं ।
👉 पानी जवानी बनाये रखता है । पानी के सेवन से शरीर में झुर्रियां नहीं पड़ती  ।
 शरीर में इसके अलावा भी जल बहुत कार्य करता है, जिससे शरीर में नीर  की कमी होने पर शरीर पसीने के रूप में पानी बाहर निकालना बंद कर देता है  ।
👉 जब बाहर का टेम्प्रेचर 45° डिग्री के पार हो जाता है  और शरीर की कूलिंग व्यवस्था ठप्प हो जाती है, तब शरीर का तापमान 37° डिग्री से ऊपर पहुँचने लगता है।*
👉 शरीर का तापमान जब 42° सेल्सियस तक पहुँच जाता है तब रक्त गरम होने लगता है और रक्त मे उपस्थित प्रोटीन  पकने लगता है  जैसे उबलते पानी में अंडा पकता है
👉  बहुत ज्यादा गर्मी, गर्म जलवायु से स्नायु  नाड़ियां कड़क होने लगती है इस दौरान सांस लेने के लिए जरुरी स्नायु भी काम करना बंद कर देती  हैं ।
👉 शरीर का पानी कम हो जाने से रक्त गाढ़ा होने लगता है, ब्लडप्रेशर low हो जाता है, महत्वपूर्ण अंग  विशेषतः ब्रेन  (Brain)तक ब्लड (Blood)  सप्लाई (Supply) रुक जाती है।
👉 व्यक्ति कोमा में चला जा सकता है और उसके शरीर के एक- एक अंग कुछ ही क्षणों में काम करना बंद कर देते हैं, और उसकी मृत्यु हो जाती है।
👉गर्मी के दिनों में ऐसे नुकसान  बचने  के लिए  लगातार थोडा थोडा पानी पीते रहना चाहिए, और हमारे शरीर का तापमान 37° डिग्री सेल्सियस  मेन्टेन किस तरह रह पायेगा इस ओर  ध्यान देना चाहिए ।
1 भयंकर गर्मी या गर्म हवाओं के बीच
दुपहर में 2 से 3 के बीच ज्यादा से ज्यादा
घर, कमरे या ऑफिस के अंदर रहने का
प्रयास करें ।
 40 डिग्री सेल्सियस तापमान के आस पास विचलन की अवस्था रहती है । इस दौरान
 बेचेनी, जी मिचलाना उल्टी-दस्त से परेशान या पीड़ित होने की संभावना बढ़ जाती है ।
 जिसका असर सीधे दिमाग
Brain पर होता है ।
 इसलिए जरूरी है कि गुलकन्द, सेव मुरब्बा,
 बादाम, मेवा, ब्राह्मी, शंखपुष्पी, स्मृतिसागर
 रस आदि से निर्मित अमृतम ब्रेन की  गोल्ड माल्ट
Brainkey Gold Maltका नियमित सेवन करना शरीर तन-मन
 के लिए अति हितकारी है । यह मानसिक शांति प्रदायक है ।
अमृतम ब्रेन की गोल्ड माल्ट का उपयोग  गर्मी से प्रकट हर तरह की पीड़ा को शांति में परिवर्तन कर शरीर मे निर्जलीकरण और सूर्याताप की स्थिति को कम कर देगा।
गर्म  हवाओं का दुषप्रभाव भूमध्य रेखा
 के ठीक ऊपर सूर्य चमकने के कारण पैदा होता है । इससे धरती व पर्वतों पर तपन पैदा हो जाती है ।
अतः स्वयं को और अपने जानने वालों को पानी अमृतम हर्बल दवाओं की कमी से ग्रसित न होने दें।
किसी भी अवस्था मे *कम से कम 3 लीटर पानी जरूर पियें* ।  किडनी की बीमारी वाले प्रति दिन कम से कम 6 से 8 ली.  जल जरूर ग्रहण करें ।
जहां तक सम्भव हो अपना ब्लड प्रेशर
 चेक करते रहें ।
इस खतरनाक गर्मी के कारण  किसी को भी हीट स्ट्रोक हो सकता है।
ठंडे पानी से  दोनों समय स्नान करें ।
दही / छाछ   का   प्रयोग केवल दिन में
अधिक से अधिक   करें  !
फल और सब्जियों तथा मूंग की छिलके वाली डाल को भोजन मे ज्यादा स्थान दें  । सुबह-शाम ब्रेन की माल्ट का सेवन करें ।
इसे अंग्रेजी में हीट वेव भी कहते हैं । यह
हीट वेव कोई मजाक नही है।
एक बिना प्रयोग की हुई मोमबत्ती को कमरे से बाहर या खुले मे रखें, यदि मोमबत्ती पिघल जाती है तो ये गंभीर स्थिति है अर्थात तापमान बहुत ही ज्यादा है ।
शयन कक्ष और अन्य *कमरों में  2 आधे पानी से भरे ऊपर से खुले पात्रों को रख कर  कमरे की नमी बरकरार रखी जा सकती है  ।
अपने होठों और आँखों को नम रखने  के लिए चंदन, बादाम जैतून से निर्मित
(Kayakey Body Oil)  सर्वप्रथम सिर पर लगाकर पूरे शरीर की मालिश कर, स्नान करें ।
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