जाने – आयुर्वेद के बारे में पार्ट – 5

जाने – आयुर्वेद के बारे में पार्ट – 5
पिछले आर्टिकल पार्ट 4 में
4 तरह की अग्नि से पैदा होने वाले रोग के बारे में बताया था।
“इस आलेख में जानिए रोग के प्रकार”
रोग तीन तरह के होते हैं

【1】निज रोग —

त्रिदोषों यानि वात, पित्त व कफ के बिगड़ने
से शरीर में जो रोग होते हैं वे “निज रोग” कहे
जाते हैं। निज रोग से पीड़ित व्यक्ति कभी

पूरी तरह स्वस्थ्य नहीं रहता।

उपचार

【】 त्रिफला,
【】त्रिकटु,
【】त्रिसुगन्ध औऱ
【】आंवला मुरब्बा,
【】सेव मुरब्बा एवं

【】हरड़ मुरब्बे

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का सेवन करते रहना चाहिए।
या फिर, उपरोक्त योगों से निर्मित
अमृतम गोल्ड माल्ट लेना जरूरी है।

【2】आगंतुक रोग

विष या विषाक्त युक्त मेडिसिन के
लगातार उपयोग से, गन्दी हवा,
प्रदूषित वायु और चोट
दुर्घटना वगैरह के कारण जो व्याधि होती हैं,
उन्हें आगन्तुक रोगों की श्रेणी में रखा गया है।

【3】मानसिक रोग

[[]] मन मुताबिक कार्य न होने से
[[]] किसी प्रिय वस्तु के न मिलने से
[[]] चिन्ता, तनाव ज्यादा पालने से
[[]] अवसाद (डिप्रेशन) की वजह से
[[]] पूरी नींद न लेने से
[[]] बहुत गर्म चीजों के खाने से
जो रोग होते हैं वे मानसिक रोग कहलाते हैं।
मानसिक रोगों का आयुर्वेद में शर्तिया इलाज
यह ब्राह्मी, बच, मालकांगनी,
स्मृतिसागर रस, त्रिलोक्य चिंतामणी रस

से निर्मित है।

अगले आर्टिकल पार्ट 6 में

तीन रोग स्थान के बारे में जाने

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