थायराइड (ग्रंथिशोथ) , संधिशोथ (ऑर्थराइटिस) ,गठिया , जोड़ों के दर्द ( जॉइंट पैन) सर्वाइकल प्रॉब्लम की अदभुत जानकारी

जोड़ों का दर्द (जॉइंट पैन)

एक विकराल समस्या

घुटनो में दर्द , जोड़ों में दर्द  (जॉइंट पैन)
को आयुर्वेद ग्रंथो में इसे सन्धिवात औऱ संधिशोथ कहा गया है।
कमर दर्द , हाथ-पैरों का दर्द अन्य जॉइंट्स में दर्द ,  या सर्वाइकल सायटिका या मांशपेशियों में खिंचाव होना आदि परेशानियों से दुनिया के 50 फीसदी लोग पीड़ित हैं।
विशेषकर अधेड़ उम्र के नर-नारी,ब्रह्मचारी
औऱ कंप्यूटर पर काम करने वाले युवक-युवतियां इस वातरोग एवं ऑर्थराइटिस की प्रॉब्लम से बहुत दुःखी हैं।

शुरुआत में छोटे-मोटे जोड़ जैसे- उंगलियों के जोड़ों में दर्द आरंभ होकर यह कलाई, घुटनों, अंगूठों में बढ़ता जाता है।
■ जोड़ों को मोड़ने में परेशानी होना
■ जोड़ों का लाल होना
■ जोड़ों (जॉइंट) में खिंचाव महसूस होना
■ जोड़ों पर कठोरता होना
■ चलने- फिरने में दिक्कत होना
■ जोड़ों में अकड़न आना
■ जोड़ों में सूजन और दर्द
■ जोड़ों में कमजोरी होना

आयुर्वेदिक मत-

आयुर्वेद शास्त्रों में जॉइंट पैन , गठिया , संधि शोथ होने का  कारण बताया है कि
शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रणाली 
(इम्यून सिस्टम)अपनी ही कोशिकाओं को पहचान नहीं पाती हैं और इसलिए उसे संक्रमित कर देती है जिससे अनेको वात-व्याधियां जीवन में बाधा खड़ी कर देती हैं इन्हीं कारणों से थायराइड , संधिशोथ , ऑर्थराइटिस ,कमर दर्द , जोड़ों में दर्द , सूजन आदि रोग
रग-रग में रमने लगते हैं।

संधि शोथ का अर्थ है 

“जोड़ों में लगातार दर्द रहना”। यह शरीर में  ८८
प्रकार के वात-विकार उत्पन्न करता है।
संधिशोथ की वजह से थायराइड ,  जोड़ों में दर्द, अकड़न या सूजन (वर्तमान में हो या न हो) आ जाती है।
सामान्यतः 3 प्रकार के संधि शोथ
(आर्थराइटिस) होते हैं:
■  गठिया ग्रस्त
■■ अस्थि संधि शोथ (आर्थराइटिस)
■■■  जोड़ो के आसपास गांठे पड़ना

संधिशोथ(आर्थराइटिस) के लक्षणः

◆ जोड़ों में दर्द या नरमी (दर्द या दबाव) जिसमें चलते समय, कुर्सी से उठते समय, लिखते समय, टाइप करते समय, किसी वस्तु को पकड़ते समय, सब्जियां काटते समय आदि जैसे हिलने डुलने की क्रियाओं में कम्पन्न होने पर स्थिति काफी बिगड़ जाती है।
बेकर्स सिस्ट-
आर्थराइटिस जैसे अन्य कारणों से सूजन भी हो सकती है। यदि सिस्ट फट जाती है तो आपके घुटने के पीछे का दर्द नीचे आपकी पिंडली तक जा सकता है।
घिसा हुआ कार्टिलेज (उपास्थि)(मेनिस्कस टियर)- घुटने के जोड़ के अंदर की ओर अथवा बाहर की ओर दर्द पैदा कर सकता है।
औऱ भी परेशानी खड़ी हो सकती है–
◆  सुबह-सुबह अकड़न-जकड़न होना
◆घुटनों , जोड़ों के लचीलेपन में कमी
◆ शरीर व जोड़ों को ज्यादा हिला डुला नहीं पाना
◆जोड़ों की विकृति की वजह से अचानक मेदोवृद्धि या वजन घटना और थकान।
◆ चटकने की आवाज होना। खड़-खड़ाना (चलने पर संधि शोथ वाले जोड़ों की आवाज आना)
जॉइंट पेन की अहम वजह-
बढ़ती उम्र के साथ ही होने वाली कुछ तकलीफें जोड़ों में दर्द के मुख्य कारण होते हैं जैसे कि-
● हड्डियों में रक्त की आपूर्ति में रूकावट आना
●● हड्डियों में मिनरल यानि की खनिज की कमी होना
●●● घुटने में आगे की तरफ दर्द जो सीढ़ियों पर चढ़ते और उतरते समय बढ़ जाता है।
●●●● जोड़ों (जॉइंट) पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ना

 संधिशोथ होने का मूल कारण क्या है-

 आजकल की अधिकांश बीमारियां  पाचन तन्त्र की खराबी और खानपान की वजह से हो रही हैं।
आयुर्वेद सिद्धान्तों के अनुसार किये गए भोजन
के न पचने के कारण उदर विकार उत्पन्न हो जाते हैं।
पेट खराब की लगातार खराबी के कारण कब्जियत होने लगती है। वायु-विसर्जन न हो पाने से धीरे-धीरे इम्युनिटी एवं मेटाबोलिज्म सिस्टम बिगड़ने लगता है।

क्यों होता है जॉइन्ट पैन

शरीर की पाचनप्रणाली दूषित होने से उदर की नाड़ियाँ जाम होकर सख्त व कठोर होने लगती है इस कारण  रस ओर रक्त का संचार अवरुद्ध हो जाता है। रक्त नाडियों एवं कोशिकाओं में खून का सर्कुलेशन नहीं हो पाने से जोड़ो व हाथ-पैरों में दर्द होने लगता है। शरीर के कई हिस्सों में सूजन आने लगती है।
व्यक्ति थायराइड जैसी असाध्य बीमारी से घिर जाता है।
 हड्डियां में रस नहीं बनने से वे कमजोर होकर चटकने औऱ टूटने  लगती हैं।
जोड़ों में तरलता (लिक्विड) कम होने लगता है
इसके कारण घुटने बदलवाने की नोबत आ जाती है।
पाचन तन्त्र (मेटाबोलिज्म) की खराबी से पूरे शरीर में अनेक बीमारियां पनपने लगती हैं।
जोड़ों में जकड़न-अकड़न आने लगती है
रग-रग तथा नसों में दर्द होने लगता है।
कमर एवं हाथ-पैरों की उंगलियों के जॉइंट
में असहनीय पीड़ा होती है।
जोड़ों में इंफेक्शन होना
हड्डियों का सूखना , कमजोर होना , टूटना
अचानक मोच आना या चोट लगना
त्रिदोष औऱ यूरिक एसिड विषम होने लगता है।
पंजों , जोड़ों तथा शरीर में सूजन आने लगती है।
गले में दर्द औऱ सूजन से शरीर कराह उठता है।
पूरे शरीर में दर्द औऱ आलस्य बना रहता है।
शरीर में भारीपन आने लगता है जिससे कोई भी काम करने की ऊर्जा-उमंग कम हो जाती है।
संधिशोथ (ऑर्थराइटिस)
गर्दन के आसपास के मेरुदंड
की हड्डियों की असामान्य बढ़ोतरी
थायराइड (ग्रंथिशोथ) जैसे 88 प्रकार के वातरोग
तन को तहस-नहस कर देते हैं।

क्या है सर्वाइकल स्पाॉन्डिलाइसिस-

ग्रैव अपकशेरुकता (सर्वाइकल स्पाॉन्डिलाइसिस या सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस) ग्रीवा (गर्दन) के आसपास के मेरुदंड की हड्डियों की असामान्य बढ़ोतरी और सर्विकल वर्टेब के बीच के कुशनों (इसे इंटरवर्टेबल डिस्क के नाम से भी जाना जाता है)

सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस के लक्षण- 

गलत तरीके से बैठने औऱ
ज्यादा समय तक झुककर काम करने वालों को
 अधिक होता है ‘सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस’।
गर्दन में दर्द होना, दर्द के साथ चक्कर आना आदि हैं इसके प्रमुख लक्षण हैं
बचाव के लिए गर्दन के दर्द को अनदेखा ना
करें।
सामान्यतः 5वीं और 6 ठी (सी5/सी6), 6ठी और 7वीं (सी6/सी7) और 4थी और 5वीं (सी4/सी5) के बीच डिस्क का सर्वाइकल
 वर्टेब्रा प्रभावित होता है
लक्षणः
सर्वाइकल
 भाग में डी-जेनरेटिव परिवर्तनों वाले व्यक्तियों में किसी प्रकार के प्रारंभिक लक्षण दिखाई नहीं देते या असुविधा महसूस नहीं होती। सामान्यतः लक्षण तभी दिखाई देते हैं जब
 नस या मेरुदंड में दबाव या खिंचाव होता है। इसमें निम्नलिखित समस्याएं भी हो सकती हैं-
गर्दन में दर्द जो बाजू और कंधों तक जाता है
गर्दन में अकड़न जिससे सिर हिलाने में तकलीफ होती है
सिर दर्द विशेषकर सिर के पीछे के भाग में (ओसिपिटल सिरदर्द)
कंधों, बाजुओं और हाथ में झुनझुनाहट या असंवेदनशीलता या जलन होना
मिचली, उल्टी या चक्कर आना
मांसपेशियों में कमजोरी या कंधे, बांह या हाथ की मांसपेशियों की क्षति
निचले अंगों में कमजोरी, मूत्राशय और मलद्वार पर नियंत्रण न रहना (यदि मेरुदंड पर दबाव पड़ता हो)
ऑर्थराइटिस की समस्या 30 साल से ज्यादा उम्र वाले  ज्यादातर लोगो मे पाई जाने लगी है।
लगातार लापरवाही एवं ध्यान ना देने की वजह से गैस एसिडिटी ,  यूरिक एसिड बनना प्रारम्भ होता है और फिर जॉइंट्स में जकड़न होना ,
घुटनो में कट कट की आवाज आना ,
केल्सियम कमी को दर्शाता है।
वातरोग श्रेणी के यह रोग सही चिकित्सा ना मिलने की वजह से बढ़ता जाता है और आगे गठिया के रूप में उभरता है ।
 ये विषय बहुत विस्तृत है। एक बात जो हमेशा याद रखना चाहिये कि पेट के रोग , वातविकार व संधिशोथ ये बीमारियां  सम्पूर्ण चिकित्सा बिना ठीक नहीं होती।
 कोई भी  पैन किलर इस बीमारी का स्थाई इलाज नही है, क्योंकि इनसे क्षणिक आराम मिल सकता है पर भविष्य में ये ओर भी साइड इफेक्ट्स के साथ उभरता है

 आयुर्वेद देता है साइड बेनिफिट

आयुर्वेद  में इस तरह के रोगों को वात दोष कहा गया है । आयुर्वेद ने भेद के हिसाब से लगभग अट्ठासी प्रकार के वात दोष बताए है पर समस्त वात दोष का प्रारम्भ खानपान की अनियमित शैली को ही माना गया है इसलिए
अमृतम फार्मास्युटिकल्स , ग्वालियर आपके लिए 88 तरह के वात दोष का पूर्णतः देशी लेकर आया है जिसमे आपको कुछ सयंमित नियमो के साथ दवा शुरू करनी है और आप देखेंगे कि पहले हफ्ते ही आपको आराम मिलने लगेगा ।
आइये चर्चा करते हैं- अमृतम के इन उत्पादों पर ।

ऑर्थोकी गोल्ड माल्ट 

ORTHOKEY GOLD MALT

 जैसा कि ऊपर बताया है कि वात दोषो की प्रमुख जड़ कब्ज है इसलिए ऑर्थोकी गोल्ड माल्ट एक ऐसा हर्बल फ़ॉर्मूला जिसमे कब्ज जैसी जटिल बीमारी को दूर करने लिए आँवला मुरब्बा ,
 सेव मुरब्बा , हरड़ मुरब्बा , गुलकन्द ,
 रास्ना , अमलताश , त्रिफला आदि ओर साथ ही पाचक शक्ति बढ़ाने के लिए पोदीना , जीरा , आदि का मिश्रण है ताकि भोजन आसानी से पच सके और उदर अपना कार्य सुचारू रूप से करता रहे।
 ऑर्थोकी गोल्ड माल्ट पाचन तन्त्र (मेटाबॉलिज्म)
 को करेक्ट करता है।
 उदार की कड़क ,कठोर औऱ जाम नाडियों को मुलायम बनाकर पेट साफ रखता है।
 हड्डियों में तरलता (लिक्विड) बनाकर लचीलापन लाता है।
 सूजन , अकड़न मिटाता है।
 स्फूर्ति प्रदान कर शरीर को स्वस्थ्य सुन्दरता
 प्रदान करना इसका विलक्षण गुण है।
 यूरिक एसिड कंट्रोल करता है।
एक असरकारक पैन रिलीफ हर्बल कैप्सुल
स्वर्ण भस्म ,
त्रिलोक्य चिंतामणि रस स्वर्ण युक्त
रसराज रस स्वर्ण युक्त
वृहतवात चिंतामणि रस स्वर्ण युक्त
योगेंद्र रस स्वर्ण युक्त
शिलाजीत , गुग्गुल ,शल्लकी ,
निर्गुन्डी , त्रिकटु , अश्वगंधा ,
शतावर , मधुयष्टि
 जैसी आयुर्वेदिक जड़ीबूटियों औऱ कई प्रकार की  आयुर्वेदिक औषधियों जैसे- अमृता ,
 अर्जुन , तुलसी , एरण्डमूल की भावना देकर तैयार किया ऑर्थोकी गोल्ड कैप्सुल जो कि तुरन्त किसी भी प्रकार के दर्द को रोकता है और यूरिक एसिड
 बनने नहीं देता। साइटिका सरवाइकल जैसे दर्द में आराम पहुंचाता है। थायराइड ,संधिशोथ ,
 जोड़ों के दर्द , 88 तरह के वातरोगों को दूर करता है। गठिया रोग का शर्तिया इलाज है।
 इम्यूनिटी पॉवर बढ़ाता है।
ऑर्थोकी पैन ऑइल– जायफल जावित्री आदि  शक्तिशाली आयुर्वेदिक औषधियों के संगम से  क्षीरपाक विधि से तैयार किया गया दर्दनिवारक तेल जिसकी प्रभावित जगह पर हल्के हाथों से मसाज करने पर दर्द में तुरन्त आराम मिलता है

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